चक्कर आना? वर्टिगो के लक्षण, कारण और उपचार

क्या आपने कभी खुद को ऐसी स्थिति में पाया है जब आपको चक्कर आ रहे हों और सिर में भारीपन महसूस हो? विचलित हों? और परिवेश घूमता नज़र आए? वर्टिगो कुछ ऐसा ही लगता है। वर्टिगो किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन यह ज्यादातर 65 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करता है। लगातार चक्कर आना इस बात का संकेत है कि हमारे शरीर में कुछ गड़बड़ है।

सामान्य सर्दी, दस्त और कान के संक्रमण के कारण कभी-कभी चक्कर आना संभव है और इसका इलाज किया जा सकता है।, लेकिन जब बार-बार चक्कर आए तो उन्हें नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत किसी कान के डॉक्टर (ईएनटी विशेषज्ञ) के पास जाएँ। आइए हम चक्कर आना या वर्टिगो के कारणों, लक्षणों और उपलब्ध उपचारों के बारे में जाने।

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चक्कर आना वर्टिगो के लक्षण, कारण और उपचार. Image Courtesy: Wikimedia Commons

चक्कर आना कौन सी बीमारी के लक्षण हैं?

चक्कर आना वर्टिगो का एक संकेत है। वर्टिगो एक आम स्वास्थ्य समस्या है और बहुत से लोग इससे पीड़ित हैं। इसमें सिर में चक्कर आते हैं और उस व्यक्ति को यह भी लगता है कि वे किसी प्रकार की गति में हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि वर्टिगो कोई बीमारी नहीं है, बल्कि हमारे शरीर में अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का लक्षण है।

कुछ लोगों को ऊंचाई से नीचे देखने पर या अन्य बीमारियों के कारण चक्कर आने का अनुभव हो सकता है। वर्टिगो दो प्रकार का होता है, सेंट्रल वर्टिगो व पेरिफेरल वर्टिगो। (Central Vertigo and Peripheral Vertigo)

चक्कर आते समय कैसा लगता है?

इसका पता लगाना काफी चुनौतीपूर्ण है, जब तक कोई इसका अनुभव नहीं करता। कुछ लोग अचानक धुंधली दृष्टि और चक्कर का अनुभव करते हैं, उन्हें लगता है कि वे गति में हैं, भले ही वे चल नहीं रहे हों या उन्हें ऐसा महसूस होता है कि परिवेश घूम रहा है।

चक्कर आना या वर्टिगो के लक्षण क्या हैं?

चक्कर आना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है बल्कि अन्य बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षणों का संकेत है। यह ज्यादातर कई अन्य लक्षणों के साथ होता है, चक्कर आने के कुछ अन्य लक्षण हैं:

  • उठने पर चक्कर आना
  • सिर में भारीपन और चक्कर आना
  • मोशन सिकनेस। (यात्रा करते समय चक्कर आना)
  • कानों के अंदर हवा का अहसास
  • टिनिटस या कान में सीटी बजना
  • संतुलन में समस्या
  • लेटने पर चक्कर आना
  • सिर का चक्कर के साथ सिरदर्द।

चक्कर आने के कारण क्या हैं?

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चक्कर के कारण घूमता हुआ परिवेश. Image Courtesy: pxhere.com

चक्कर आना शरीर में अस्थायी परिवर्तन या स्थायी बीमारी का परिणाम हो सकता है; यह सेंट्रल या पेरिफेरल वर्टिगो हो सकता है।

सेंट्रल वर्टिगो मस्तिष्क या केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) से जुड़ा होता है, जबकि पेरिफेरल वर्टिगो कानों से संबंधित होता है; लगभग 93% मामले पेरिफेरल वर्टिगो के हैं।

नीचे कुछ अन्य सामान्य स्थितियां हैं जो चक्कर आना और उल्टी का कारण बन सकती हैं।

लैबिरिंथाइटिस (Labyrinthitis)

यह समस्या संक्रमण के कारण भीतरी कान में सूजन से होती है। इस क्षेत्र में वेस्टिबुलोकोक्लियर नर्व एंडिंग्स (vestibulocochlear nerve endings) मस्तिष्क की कोशिकाओं को उत्तेजित करते हैं जो अचानक चक्कर आना और अन्य मामले जैसे कान में दर्द या धुंधली दृष्टि का कारण बनते हैं।

वेस्टिबुलर न्यूरिटिस (Vestibular Neuritis)

यह स्थिति लगभग लैबिरिंथाइटिस के समान है, लेकिन यहां वेस्टिबुलर तंत्रिका में सूजन आ जाती है। लेकिन इस स्थिति में व्यक्ति को बहरापन का सामना नहीं करना पड़ता है, जो कि लैबिरिंथाइटिस के मामले में एक महत्वपूर्ण लक्षण है। वेस्टिबुलर न्यूरिटिस के लक्षण जी मिचलाना, धुंधली दृष्टि और संतुलन की समस्या हैं।

बेनाइन पैरॉक्सिज्मल पोजिशनल वर्टिगो (Benign Paroxysmal Positional Vertigo)

बेनाइन पैरॉक्सिज्मल पोजिशनल वर्टिगो (बीपीपीवी) सबसे आम कारण है, यह समस्या हमारे सिर के हिलने से होती है। इस संचलन के कारण आंतरिक कान में छोटे कैल्शियम कार्बोनेट क्रिस्टल (कण) इधर-उधर हो जाते हैं, और अर्ध-वृत्ताकार नहर (सेमि सर्कुलर कैनाल) में संवेदी कोशिकाओं (सेंसरी सेल्स) को छूते हैं जो गंभीर चक्कर आने का कारण बनते हैं।

प्रारंभिक गर्भावस्था में चक्कर आना

गर्भावस्था वह समय है जब महिलाएं कई हार्मोनल परिवर्तनों से गुजरती हैं। गर्भावस्था में अक्सर आंतरिक कान में तरल पदार्थ की विशेषताओं में बदलाव होता है जिससे प्रारंभिक गर्भावस्था मे चक्कर आ सकता है।

चक्कर आने की अन्य परिस्थितियां क्या हैं?

ऊपर बताई गई स्थितियों के अलावा, कई अन्य स्थितियों के कारण चक्कर आ सकते हैं, जैसे सिर में चोट, कान की सर्जरी और मल्टीपल स्केलेरोसिस। (Multiple Sclerosis)

चक्कर आने के और क्या कारण हो सकते हैं?

सामान्य स्थितियों के अलावा, कुछ बीमारियां वर्टिगो का कारण बन सकती हैं। नीचे कुछ संबंधित रोग दिए गए हैं।

कोलेस्टेटोमा (Cholestoma)

कोलेस्टेटोमा एक प्रकार की चर्म की वृद्धि है जो कान के मध्य भाग में देखी जाती है लेकिन यह चर्म की वृद्धि कैंसर नहीं है। यह बार-बार होने वाले संक्रमण के कारण होता है। कोलेस्टीटोमा आमतौर पर कान के परदे के पीछे बढ़ता है और मध्य कान के ऊतक को नष्ट कर सकता है। यह चक्कर आना और बहरापन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

मेनियर रोग (Ménière’s Disease)

मेनियर रोग मध्य कान का एक विकार है और इससे चक्कर आना, उल्टी, टिनिटस और बहरापन हो सकता है।

पेरिलीम्फ फिस्टुला (Perilymph Fistula)

पेरिलीम्फ फिस्टुला कान का परदा फटने या कुछ मामलों में भीतरी कान और मध्य कान के बीच के लिगामेंट (स्नायुबंधन) फटने के कारण होता है। नतीजतन, द्रव विस्थापित हो जाता है जिससे मस्तिष्क के साथ संचार नहीं हो पाता है। पेरिलीम्फ फिस्टुला भी लगातार चक्कर आना, सिरदर्द और वर्टिगो के अन्य लक्षण का कारण बन सकता है।

ओटोस्क्लेरोसिस (Otosclerosis)

ओटोस्क्लेरोसिस मध्य कान में हड्डी की असामान्य वृद्धि है; यह एक रुकावट का कारण बनता है जिसके लिए सर्जरी की सलाह दी जाती है। ओटोस्क्लेरोसिस चक्कर आना और असंतुलन का कारण बनता है।

गतिभंग (अटेक्सिया – Ataxia)

गतिभंग मांसपेशियों, नसों या सीधे मस्तिष्क में चोट लगने के कारण होता है, मुख्य रूप से अनुमस्तिष्क (Cerebellum) पर, जो शरीर में संतुलन और समन्वय बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है।

माइग्रेन (Migraine)

माइग्रेन सिर में चक्कर आने का कारण बन सकता है। माइग्रेन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे तनाव और तेज़ तीखा गंध। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को उन चीजों से दूर रहने की जरूरत है जो इस स्थिति को बढ़ावा दे सकती हैं।

एकॉस्टिक न्यूरोमा (Acoustic Neuroma)

एकॉस्टिक न्यूरोमा भीतरी कान के पास वेस्टिबुलोकोक्लियर तंत्रिका (vestibulocochlear nerve) पर एक सौम्य वृद्धि है। एकॉस्टिक न्यूरोमा चक्कर आना और असंतुलन का कारण बन सकता है।

चक्कर आने के अन्य कारण:

  • हृदय रोग जो वृद्ध लोगों में काफी आम हैं, चक्कर आने का एक कारण हो सकता है ।
  • कान में गंभीर संक्रमण या अन्य समस्या भी ऐसे कारण हैं जिन पर तत्काल ध्यान देने और उपचार की आवश्यकता है।
  • सिर पर किसी भी प्रकार की चोट।
  • किसी भी प्रकार की दवा जो आप ले रहे हैं जैसे कि मनोविकार रोधी या अवसादरोधी। (Antipsychotics or Antidepressants)

वर्टिगो टेस्ट कैसे होता है?

कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल असंतुलन के कारण चक्कर आते हैं, लेकिन यह चक्कर अस्थायी होते है। यदि चक्कर आना स्थायी है, तो निम्नलिखित परीक्षण निदान करने में मदद करेंगे।

हेड थ्रस्ट टेस्ट (Head Thrust Test)

हेड थ्रस्ट टेस्ट या हेड इंपल्स टेस्ट (Head impulse test) रिफ्लेक्स सिस्टम का परीक्षण करने के लिए किया जाता है। यह टेस्ट आंखों और आंतरिक कान के समन्वय को निर्धारित करता है।

रोमबर्ग टेस्ट (Romberg Test)

चिकित्सक आपको अपनी आँखें बंद करने और अपने पैरों को आपस में जोड़कर खड़े होने के लिए कहेंगे। इस परीक्षण में आपका संतुलन देखा जाता है।

फुकुदा-अनटरबर्गर टेस्ट (Fukuda-Unterberger Test)

डॉक्टर आपको अपनी आँखें बंद करने और सीधे चलने के लिए कहेंगे, यह देखा जाएगा कि आप सीधे चलते हैं या केंद्र रेखा के बाएँ या दाएँ चलते हैं, परीक्षण आपके चलने की दिशा के आधार पर चक्कर से प्रभावित शरीर के पक्ष का निदान करता है।

डिक्स-हॉलपाइक टेस्ट (Dix-Hallpike Test)

मानक डिक्स-हॉलपाइक शारीरिक क्रिया blog image
मानक डिक्स-हॉलपाइक शारीरिक क्रिया. Image Courtesy: Store medisinske leksikon Creative Commons

डिक्स-हॉलपाइक टेस्ट में, आपको अपने सिर को 45 डिग्री के कोण पर एक तरफ घुमाने के लिए कहा जाएगा, और फिर दूसरी तरफ, चिकित्सक आपकी आँखों का निरीक्षण करके यह निर्धारित करेंगे कि समस्या भीतरी कान में है या मस्तिष्क में। सावधान : गर्दन घुमाने से चक्कर आना संभाव है।

वर्टिगो से जुड़े रोगों का निदान

एक बार जब निदान वर्टिगो की उपस्थिति की पुष्टि कर देता है, तो इसके कारण को जानना आवश्यक है।
चिकित्सक पहले कानों की जांच करेंगे, ताकि पता चल सके कि समस्या कान से संबंधित है या नहीं। इसकी पुष्टि के लिए आपको प्योर-टोन और इम्पीडेंस ऑडियोमेट्री टेस्ट से गुजरना होगा।

यदि यह कान से संबंधित समस्या नहीं है, तो एमआरआई या सीटी स्कैन जैसे परीक्षण अगला कदम है। गंभीर मामलों में, न्यूरोइमेजिंग (Neuroimaging) (तकनीक तंत्रिका संबंधी बीमारियों का भी निदान करती है जो वर्टिगो से जुड़ी बीमारी का कारण हो सकती हैं।

वर्टिगो के उपचार क्या हैं?

  • वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन (Vestibular Rehabilitation) चक्कर के लिए एक भौतिक चिकित्सा है, यह संतुलन में सुधार करने और चक्कर आने एवं सिरदर्द को कम करने के लिए वेस्टिबुलर सिस्टम को मजबूत करता है।
  • यदि यह गर्भावस्था के कारण है, तो चिकित्सक हिस्टमीन रोधी जैसी दवाएं लिखेंगे जो मुख्य रूप से मतली या जी मिचलाना के लिए होती हैं।
  • सौम्य बेनाइन पैरॉक्सिज्मल पोजिशनल वर्टिगो (बीपीवीवी) की स्थिति में, चिकित्सा विशेषज्ञ आपको असामान्य शारीरिक क्रिया का अभ्यास करने के लिए कह सकते हैं। चक्कर को रोकने के लिए आंतरिक कान में कैनालिथ कणों (Otoconia) को साफ करने के लिए इप्ले रिपोजिशनिंग शारीरिक क्रिया (Epley repositioning maneuver) शारीरिक क्रिया का उपयोग किया जाता है।
  • यदि सिर में चक्कर सर्दी या कान के संक्रमण के कारण आते है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देंगे।
  • हिस्टमीन रोधी (Antihistamine), बेंजोडायजेपाइन (Benzodiazepines) और एंटीमेटिक्स (Anitiemetics) जैसी दवाऐं निर्धारित की जाती है।
  • मेनियर रोग के लिए मूत्रवर्धक (Diuretic) दवाएं एक विकल्प हैं।

वर्टिगो के घरेलू उपचार

हालांकि डॉक्टरों से सलाह लेना हमेशा अच्छा होता है, तत्काल राहत के लिए वर्टिगो के घरेलू उपचार आजमा सकते हैं।

  • अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे बदलाव लाइए, जैसे वर्टिगो के लिए व्यायाम; इप्ले मनुवर को अपने व्यायाम दिनचर्या का हिस्सा बनाना बहुत मददगार हो सकता है।
  • आंखें बंद करके बैठना या लेटना।
  • लेटे हुए आराम करना स्ट्रोक से पीड़ित लोगों को राहत देता है।
  • सोते समय अपने सिर के नीचे एक अतिरिक्त तकिया रखें।
  • सुबह धीरे-धीरे उठें, झटके से उठने से चक्कर आ सकते हैं।
  • हार्मोनल परिवर्तनों को नियंत्रण में रखने के लिए सही प्रकार के भोजन का सेवन करें। अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे, बादाम, सालमन, मछली और डार्क चॉकलेट जैसी चीजें शामिल करें जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) के लिए अच्छा है।
  • कुछ मामलों में एक्यूपंक्चर लगातार चक्कर आने को ठीक करने में मदद कर सकता है।
  • योग आसनों का अभ्यास करें, शून्य मुद्रा से वर्टिगो से पीड़ित लोगों को लाभ होता है।

वर्टिगो के घरेलू उपचार क्षणिक राहत के लिए हैं। यह सलाह दी जाती है कि आप डॉक्टर से परामर्श लें और उनके उपचार का पालन करें।

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