हाइपरैक्यूसिस क्या है? जानिए इसके कारण और इलाज

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हाइपरैक्यूसिस क्या है?

हाइपरैक्यूसिस एक श्रवण विकार है जो विनम्र या हल्की ध्वनियों को अत्यंत तेज और असहनीय बनाता है। हाइपरैक्यूसिस से प्रभावित व्यक्ति का दिमाग ध्वनि संकेतों को ज़रूरत से ज्यादा बढ़ाकर असहनीय एवं अत्यधिक तेज बनाता है।

यह एक प्रकार का श्रवण प्रसंस्करण विकार (Auditory Processing Disorder) है जो आवाज़ की संवेदनशीलता को बढ़ाता है। यह एक दुर्लभ विकार है जो 50,000 लोगों में से 1 को प्रभावित करता है।

हाइपरैक्यूसिस से पीड़ित व्यक्ति को दैनिक ध्वनियां जैसे दूरभाष (टेलीफोन), दरवाजे की घंटी या यातायात का शोर बहुत तेज एवं असहनीय लगता है। कई बार आवाज से असहजता बढ़ने पर कान में पीड़ा भी हो सकती है।

ध्वनि की संवेदनशीलता सौम्य है या असहनीय, यह आवाज़ की तीव्रता पर निर्भर करता है। यह एक या दोनों कानों को अचानक या धीरे-धीरे प्रभावित कर सकता है।

हाइपरैक्यूसिस के लक्षण क्या हैं?

इसका प्रत्यक्ष लक्षण यह है कि हमारे कान ध्वनि के प्रति बहुत संवेदनशील हो जाते है। वह ध्वनि जो अधिकांश लोगों के लिए सामान्य है, वही ध्वनि हाइपरैक्यूसिस से पीड़ित व्यक्ति के लिए बहुत तेज़ और असहनीय होती है। इस विकार को ध्वनि के प्रति कम सहनशीलता या शोर संवेदनशील होने के रूप में भी वर्णित किया जा सकता है।

हाइपरैक्यूसिस के सामान्य लक्षण:

  • बहुत ही कोमल या हल्की ध्वनियां सहनीय लगती हैं परंतु साधारण स्तर पर ध्वनि बहुत तेज लगती हैं।
  • कई बार सामान्य वक्तृता में बात करना भी तेज़ लगता है।
  • सिक्कों के खनकने की आवाज, एयर कंडीशनर या वैक्यूम क्लीनर की आवाज बहुत तेज और असहनीय लगती है।
  • कभी-कभी अपनी ही वाणी विकृत लगती है।
  • कुत्ते के भौंकने या गाड़ी का हॉर्न बजने जैसे शोर से असुविधा और पीड़ा होती है।
  • बहुत तेज ध्वनि के संपर्क में आने से हल्की ध्वनियों जो पहले सहनीय थीं, उनके प्रति भी संवेदनशीलता अस्थायी रूप से बढ़ सकती है।
  • टिनिटस कुछ समय के लिए बढ़ सकता हैं।

हाइपरैक्यूसिस का कारण क्या है?

अति संवेदनशीलता (Hyper Sensitivity) वंशानुगत नहीं है और अधिकतर अधिग्रहीत होती है।

हाइपरैक्यूसिस के कुछ सामान्य कारण नीचे दिए गए हैं:

  • यह सिर में चोट लगने के कारण हो सकता है और थप्पड़ जैसी छोटी सी हरकत से भी हो सकता है।
  • यह विस्फोट या कान के पास बंदूक की गोली जैसी अचानक तेज आवाज के संपर्क में आने के कारण हो सकता है।
  • कान सुरक्षा उपकरण के बिना कार्यशाला में काम करना और निरंतर तेज ध्वनि के संपर्क में रहने से हो सकता है।
  • दवाओं के कारण ओटोटॉक्सिसिटी (ototoxicity)
  • आंतरिक कान को प्रभावित करने वाला गंभीर संक्रमण
  • लाइम की बीमारी (Lyme Disease)
  • मेनिएर रोग (Ménière’s disease)
  • बहुविध ऊत्तक दृढ़न (Multiple Sclerosis)

एक कान में शोर संवेदनशीलता पीड़ित व्यक्तियों को चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए, अगर इसकी वजह एकॉस्टिक न्यूरोमा (Acoustic Neuroma) जो की एक प्रकार का ट्यूमर है, तो इसे ऑपरेशन व्दारा हटाया जा सकता है।

शोर संवेदनशीलता होने के कुछ न्यूरोलॉजिकल (Neurological) कारण

  • अभिघातज के बाद का तनाव विकार या पोस्ट-ट्रोमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)
  • अवसाद और व्यग्रता
  • बहुकालीन अधकपारी (Chronic Migraine)

हाइपरैक्यूसिस के क्या प्रकार हैं?

हाइपरैक्यूसिस के दो प्रकार होते हैं:

  • कॉक्लियर हाइपरैक्यूसिस (Cochlear Hyperacusis)
  • वेस्टिबुलर हाइपरैक्यूसिस (Vestibular Hyperacusis)

अधिकांश लोग कॉक्लियर हाइपरैक्यूसिस से पीड़ित हैं और इसके कारण असहिष्णुता एवं दर्द होता है। वेस्टिबुलर हाइपरैक्यूसिस के कारण मतली और चक्कर का अनुभव हो सकता हैं।

हाइपरैक्यूसिस को आगे और उप-वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • उंचे स्वर से होने वाला हाइपरैक्यूसिस (Loudness Hyperacusis)
  • खीज से होने वाला हाइपरैक्यूसिस (Annoyance Hyperacusis)
  • दर्द से होने वाला हाइपरैक्यूसिस (Pain Hyperacusis)

ध्वनि संवेदनशीलत के अन्य प्रकार हैं:

  • मिसोफोनिया (Misophonia)
  • फोनोफोबिया (Phonophobia)

मिसोफोनिया क्या है?

अगर ध्वनि से आपको परेशानी होती है या आपको गुस्सा आता है तो आपको मिसोफोनिया है। इस स्तिथि में, जोर से सांस लेना, उंगली दोहन, या गाड़ी के वाइपर के हिलने की आवाज़ जैसी अन्य धवनियों से झुंझलाहट होती है।

फोनोफोबिया क्या है?

फोनोफोबिया एक व्यग्रता विकार है, इसमें तेज आवाजों से डर लगता है। फोनोफोबिया से पीड़ित लोगों को ट्रैफिक का शोर या जोर से बात करने वाले लोगों से डर लगता है।

हाइपरैक्यूसिस का निदान कैसे करें?

हाइपरैक्यूसिस के लिए कोई विशिष्ट टेस्ट नहीं है, लक्षणों का एक सामान्य विवरण चिकित्सक को बताना परितृप्त है। चिकित्सक आपको ऑडियोलॉजिस्ट के पास भेजेगा ताकि आपकी सुनवाई का मूल्यांकन किया जा सके और हाइपरैक्यूसिस के निदान की पुन पुष्टि की जा सके।

हाइपरैक्यूसिस टेस्ट

ऑडियोलॉजिस्ट एक प्योर टोन ऑडियोमेट्री परीक्षण (Pure Tone Audiometry Test) का संचालन करेगा, इस्मे विभिन्न आवृत्तियों के स्वर एक साउंडप्रूफ (ध्वनिरोधी) कमरे में हेडफोन के माध्यम से कान में प्रस्तुत किए जाते हैं।

ऑडियोलॉजिस्ट कम तीव्रता के स्वर पेश करके परीक्षण शुरू करेगा और धीरे-धीरे ध्वनि के असहज स्तर पर पहुंचने तक स्वर की तीव्रता को बढ़ाता रहेगा, जिसे असहज स्तर या UCL (Uncomfortable level) के नाम से जाना जाता है। विभिन्न आवृत्तियों पर स्वर पेश करके ऑडियोलॉजिस्ट पुष्टि कर सकता है कि आप अति संवेदनशील हैं या नहीं।

हाइपरैक्यूसिस का उपचार कैसे करें?

आपका इलाज कर रहे डॉक्टर पहले जांच करेंगे कि क्या आप सिर की चोट, आंतरिक कान में संक्रमण, एकॉस्टिक न्यूरोमा या चिंता और अवसाद जैसे मनोवैज्ञानिक मुद्दों जैसे किसी अन्य कारण से पीड़ित हैं या नहीं।

अगर उत्तर हाँ है, तो हाइपरैक्यूसिस का कारण बनने वाली इन बीमारियों का इलाज करके, हम ध्वनि संवेदनशीलता का इलाज कर सकते हैं या गंभीरता को कम कर सकते हैं।

हाइपरैक्यूसिस से तत्काल राहत पाने के लिए लिए कोई उपचार नहीं है, ध्वनि विसुग्राहीकरण चिकित्सा (Sound Desensitization Therapy) बहुत उपयोगी साबित हो सकता है क्योंकि उपचार जीवन की गुणवत्ता में सुधार के अधीन हैं।

ध्वनि चिकित्सा (Sound Therapy)

इसमें चिकित्सा के साथ-साथ ध्वनि उत्सर्जित करने वाले एक बाहरी उपकरण का उपयोग होता है। बाहरी उपकरण कान की मशीन की तरह होता है जो एक प्रकार की ध्वनि उत्सर्जित करता है।

यह ध्वनि कई विभिन्न आवृत्तियों का मिश्रण है, इस प्रकार की ध्वनि को श्वेत शोर (White Noise) के रूप में जाना जाता है। कई बार इस तरह की आवाज से राहत मिलती है।

कान में इस निरंतर ध्वनि को देकर व्यक्ति को मानसिक रूप से इसे अनदेखा करना और इसे गैर-वांछित और महत्वहीन समझना सिखाया जाता है। यह व्यक्ति को वास्तविक जीवन में अवांछित ध्वनियों को अनदेखा करने और सहिष्णु बनने में मदद करता है।

संज्ञानात्मक व्यवहारपरक चिकित्सा (Cognitive Behavioral Therapy या CBT)

चिकित्सक प्रभावित व्यक्ति को उनकी विचार प्रक्रियाओं और धारणा को बदलने में मदद करता है। नकारात्मक और हानिकारक विचार जो चिंता और अवसाद को बढ़ावा दे सकते हैं, उनकी पहचान की जाती है और सकारात्मक एवं अधिक यथार्थवादी विचारों को प्रतिस्थापि किया जाता है जो व्यक्ति को बेहतर ढंग से स्थिति का सामना करने में मदद करता है।

कान संरक्षण उपकरण (Ear Protection Devices) का प्रयोग करें

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शोर से सुरक्षा के लिए इयरप्लग या कान बंद करने के उपकरण

हालांकि परेशान करने वाली बाहरी आवाज़ों को कम करने के लिए डाट (इयरप्लग) या हेडफ़ोन का उपयोग करना एक आसान उपाय है, लेकिन इयरप्लग के निरंतर उपयोग से बचना चाहिए। चूंकि इससे बाहरी ध्वनि के आदी होने की संभावना कम हो जाती है और असहिष्णुता बढ़ जाती है।

इयरप्लग को पास में रखना चाहिए और असहनीय परिस्थितियों में उनका उपयोग करना चाहिए। कुछ ध्वनियों के सीमित संपर्क से सहनशीलता का स्तर बढ़ जाता है और व्यक्ति को असंवेदनशील बना देगा।

एक समूह संचार में, यदि स्थिति अनुमति दे तो लोगों से धीरे बातचीत करने का अनुरोध करने में संकोच न करें।

सुनवाई एकीकरण चिकित्सा (Auditory Integration Therapy)

इस थेरेपी में, प्रभावित व्यक्ति को लंबे समय तक कम और कभी-कभी उच्च मात्रा में संगीत सुनाया जाता है। यह उच्च ध्वनि के प्रति सहनशीलता बढ़ाने का एक तरीका है।

टिनिटस और हाइपरैक्यूसिस में क्या अंतर है?

टिनिटस के मामले में, व्यक्ति द्वारा सुनी जाने वाली ध्वनि बाहर किसी भी स्रोत से उत्पन्न नहीं होती है। व्यक्ति द्वारा सुनी जाने वाली ध्वनि सिर के अंदर उत्पन्न होती है।

टिनिटस के मामले में प्रभावित व्यक्ति की ध्वनि सुनाई देने की तीव्रता स्तिथि पर निर्भर करती है और हर व्यक्ति के लिए भिन्न होती है। अगर व्यक्ति तनाव में हो तो ध्वनि का स्तर बढ़ जाता है।

हाइपरैक्यूसिस में बाहरी ध्वनि मौजूद होती है लेकिन यह मस्तिष्क द्वारा अत्यधिक परिलक्षित और असहनीय बन जाती है। हाइपरैक्यूसिस के साथ बहरापन या टिनिटस होने की संभावना अधिक है लेकिन यह आवश्यक नहीं है।

हाइपरैक्यूसिस से पीड़ित व्यक्ति बाहर नहीं निकलता और स्वयं चुना एकांत (self-isolation) अपना लेता है । यह उनके सामाजिक जीवन पर असर करता है। उन्हें चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए और एक उपयुक्त चिकित्सा शुरू कर देनी चाहिए ताकि वे जीतनी जल्दी हो सके सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।

References:

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC539655/
https://www.nhs.uk/conditions/hyperacusis/

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